Thursday, January 23, 2020

शायरी गुलदस्ता

“उनसे कहना की क़िस्मत पे ईतना नाज ना करे ,

हमने बारिश मैं भी जलते हुए मकान देखें हैं…… !!!!!

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ले दे के अपने पास फ़कत एक नजर तो है,
कयुं देखे जिंदगी को किसी की नजर से हम..
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वक़्त नूर को बेनूर बना देता है, छोटे से जख्म को नासूर बना देता है,
कौन चाहता है अपनों से दूर रहना पर वक़्त सबको मजबूर बना देता है.
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डर मुझे भी लगा फांसला देख कर,

पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर.

खुद ब खुद मेरे नज़दीक आती गई,

मेरी मंज़िल मेरा हौंसला देख कर…..!!

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“जिसे पूजा था हमने वो खुदा तो न बन सका,
हम ईबादत करते करते फकीर हो गए…!!!
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वो एक रात जला……. तो उसे चिराग कह दिया !!!
हम बरसो से जल रहे है ! कोई तो खिताब दो .!!!
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जलते हुए दिल को और मत जलाना,

रोती हुई आँखों को और मत रुलाना,

आपकी जुदाई में हम पहले से मर चुके है,

मरे हुए इंसान को और मत मारना.

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जरा सी चोट से शीशे की तरह टूट गया ,
दिल तो कमबख्त मेरा मुझसे भी बुजदिल निकला ………
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मुझसा ही आलसी मेरा खुदा है !
ना मै कुछ मांगता हूँ, ना वो कुछ देता है !! ”
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ऐ बुरे वक़्त ””’

जरा तेज चल ।।।
देख उस मोड़ को ””’
वहा से तू बदलने वाला हे।

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रिश्तोँ की हकीकत कोई क्या समझेगा

दिलोँ की जरूरत को कोई क्या समझेगा
मेरे दोस्त की मुस्कुराहट ही तो मेरी जिंदगी है
इस मुस्कुराहट की कीमत कोई क्या समझेगा.

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“मेरे बारे मे कोइ राय मत बनाना गालिब.
मेरा वक्त भी बदलेगा.. तेरी राय भी.”…!!!
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सोचते है, अब हम भी सीख ले यारों बेरुखी करना,,,,,,

सबको मोहब्बत देते-देते, हमने अपनी कदर खो दी है,,,,,,!

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सीख ली जिसने अदा गम में मुस्कुराने की,

उसे क्या मिटायेंगी गर्दिशे जमाने की…..

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शायद कोई तराश कर किस्मत संवार दे !
यही सोच कर मैं उम्र भर पत्थर बना रहा !!
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किसी के ऐब को तू बेनकाब ना कर,

खुदा हिसाब करेगा तू खुद हिसाब ना कर,

बुरी नज़र से ना देख मुझ को देखने वाले,

मैं लाख बुरा सही तू अपनी नज़र खराब ना कर…..

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ये भी अच्छा हुआ कि,

कुदरत ने रंगीन नही रखे ये आँसू .
वरना जिसके दामन में गिरते,
वो भी … बदनाम हो जाता …

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आज लाखो रुपये बेकार है

वो एक रुपये के सामने
जो माँ स्कूल जाते वक्त देती थी.

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आंसुओसे पलके भीगा लेता हूँ याद तेरी आती है तो रो लेता हूँ

सोचा की भुलादु तुझे मगर, हर बार फ़ैसला बदल देता हूँ!

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मैं मर भी जाऊ, तो उसे ख़बर भी ना होने देना ….

मशरूफ़ सा शख्स है, कही उसका वक़्त बर्बाद ना हो जाये …

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एक ही शख्स था मेरे मतलब का दोस्तों

वो शख्स भी मतलबी निकला……!!!”

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झुठ बोलकर तो मैं भी दरिया पार कर जाता,

मगर डूबो दिया मुझे सच बोलने की आदत ने…”

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तुझे हर बात पे मेरी जरूरत पड़ती ,

काश मैं भी कोई झूठ होता ………”

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उठाना खुद ही पडता है थका टूटा बदन अपना

कि जब तक सांस चलती है कोई कंधा नहीं देता

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ऐ मेरा जनाज़ा उठाने वालो, देखना कोई बेवफा पास न हो.

अगर हो तो उस से कहना, आज तो खुशी का मौका है, उदास न हो.

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अंधेरे मे रास्ता बनाना मुश्किल होता है,

तूफान मे दीपक जलना मुश्किल होता है,

दोस्ती करना गुनाह नही,

इसे आखिरी सांस तक निभाना मुश्किल होता है.

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पत्थर की दुनिया जज्बात नहीं समझती ;

दिल में क्या है वो बात नहीं समझती ;

तन्हा तो चाँद भी सितारों के बीच में है ;

पर चाँद का दर्द वो रात नहीं समझती।

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“दोस्तों की कमी को पहचानते हैं हम,

दुनिया के गमो को भी जानते हैं हम,

आप जैसे दोस्तों का सहारा है,

तभी तो आज भी हँसकर जीना जानते हैं हम.”

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जिंदगी एक आइना है, यहाँ पर हर कुछ छुपाना पड़ता है|
दिल में हो लाख गम फिर भी महफ़िल में मुस्कुराना पड़ता है |
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राज ना आयेगा मुजपर अब कोई भी सितम तेरा,

ईतना बिखर गया हू कि दरिंदगी भी तेरी शमँसार हो जाये.

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जिंदगी आ बैठ, ज़रा बात तो सुन,

मुहब्बत कर बैठा हूँ, कोई मशवरा तो दे।

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तुम मुझे कभी दिल, कभी आंखों से पुकारो,

ये होठों का तकल्लुफ़ तो ज़मानें के लिये है…!!!

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मेरी सब कोशिशें नाकाम थी उनको मनाने कि,

कहाँ सीखीं है ज़ालिम ने अदाएं रूठ जाने कि..

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चीखें भी यहाँ गौर से सुनता नहीं कोई;

अरे,
किस शहर में तुम शेर सुनाने चले आये!…….

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ँ
यूँ ही वो दे रहा है क़त्ल कि धमकियाँ..,
हम कौन सा ज़िंदा हैं जो मर जाएंगे..

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“वो छोटी छोटी उड़ानों पे गुरुर नहीं करता

जो परिंदा अपने लिये आसमान ढूँढ़ता है !!”

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तेरे ही अक्स को तेरा दुश्मन बना दिया
आईने ने मज़ाक़ में सौतन बना दिया….
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कम नहीं मेरी जिंदगी के लिए, चैन मिल जाये दो घडी के लिए,
ऐ दिलदार कौन है तेरा क्यों तड़पता है यू किसी के लिए.
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ये इश्क भी एक अजीब एहसास होता है…

अल्ज़फों से ज्यादा निगाहोसे बया होता है…

हर पल बस उसके गम और खुशी की फ़िक्र होती है…

इसी एहसास से तो हमको जीने का गुमान होता है…

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उगता हुआ सूरज दुआ दे आपको

खिलता हुआ फूल खुशबू दे आपको

हम तो कुछ भी देने के बाबिल नहीं,

देनेवाला हज़ार खुशिया दे आपको!

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कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है ,

मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है

मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है

ये तेरा दिल समझता है, या मेरा दिल समझता है

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आँखों से आँखों का मेल जब होता है,

दिल में एक चाहत सी जाग उठती है,

रात को सपनो में उसका चेहरा होता है,

ज़िन्दगी भी खूबसूरत अफसाना लगती ह

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ै
सादगी किसी श्रृंगार से कम नहीं होती ,
चिंगारी किसी अंगार से कम नहीं होती!

ये तो अपनी अपनी सोच का फर्क है बरना ,

दोस्ती किसी प्यार से कम नहीं होती.

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उसकी यादों को किसी कोने में छुपा नहीं सकता,

उसके चेहरे की मुस्कान कभी भुला नहीं सकता,

मेरा बस चलता तो उसकी हर याद को भूल जाता,

लेकिन इस टूटे दिल को मैं समझा नहीं सकता

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लोग कहते हैं की इतनी दोस्ती मत करो

के दोस्त दिल पर सवार हो जाए

में कहता हूँ दोस्ती इतनी करो के

दुश्मन को भी तुम से प्यार हो जाए….

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सच्चाई को अपनाना आसान नहीं

दुनिया भर से झगड़ा करना पड़ता है
ै
जब सारे के सारे ही बेपर्दा हों
ऐसे में खु़द पर्दा करना पड़ता है

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किसी को इश्क़ की अच्छाई ने मार डाला,

किसी को इश्क़ की गहराई ने मार डाला,

करके इश्क़ कोई ना बच सका,

जो बच गया उससे तन्हाई ने मार डाला

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तू चाँद और मैं सितारा होता,

आसमान में एक आशियाना हमारा होता,

लोग तुम्हे दूर से देखते,

नज़दीक़ से देखने का हक़ बस हमारा होता..

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और क्या चीज़ कुर्बान करू आप पर,
दील जिगर आपका जींदगी आपकी.
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ैनदी जब किनारा छोड़ देती है

राह की चट्टान तक तोड़ देती है
ै
बात छोटी सी अगर चुभ जाते है दिल में
ज़िन्दगी के रास्तों को मोड़ देती है

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अपनी सांसों में महकता पाया है तुझे, हर खवाब मे बुलाया है तुझे,
क्यू न करे याद तुझ को, जब खुदा ने हमारे लिए बनाया है तुझे.
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हम वो नहीं जो दिल तोड़ देंगे,

थाम कर हाथ साथ छोड़ देंगे,

हम दोस्ती करते हैं पानी और मछली की तरह,

जुदा करना चाहे कोई तो हम दम तोड़ देंगे …

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तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद

कितने चुपचाप से लगते हैं शज़र शाम के बाद

तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दुख

तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बाद

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मौसम को मौसम की बहारों ने लूटा,

हमे कश्ती ने नहीं किनारों ने लूटा,

आप तो डर गये मेरी एक ही कसम से,

आपकी कसम देकर हमें तो हज़ारों ने लूटा….

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नीम का पेड़ था बरसात थी और झूला था
गाँव में गुज़रा ज़माना भी ग़ज़ल जैसा था
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दुनिया तेरी रौनक़ से मैं अब ऊब रहा हूँ

तू चाँद मुझे कहती थी मैं डूब रहा हूँ

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चुपके चुपके पहले वो ज़िन्दगी में आते हैं,

मीठी मीठी बातों से दिल में उतर जाते है,

बच के रहना इन हुसन वालों से यारो,

इन की आग में कई आशिक जल जाते हैं

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मुझे नींद की इजाज़त भी उसकी यादों से लेनी पड़ती है,

जो खुद तो सो जाता है, मुझे करवटों में छोड़ कर!

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लाख हों हम में प्यार की बातें

ये लड़ाई हमेशा चलती है.
ै
उसके इक दोस्त से मैं जलता हूँ
मेरी इक दोस्त से वो जलती है

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मैँ कैसा हूँ’ ये कोई नहीँ जानता,
मै कैसा नहीँ हूँ’
ये तो शहर का हर शख्स बता सकता है…
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ज़िन्दगी में इक मुकाम आया तो था

भूले से सही तेरा सलाम आया तो था

न जानें तुझे खबर है, है की नहीं

मेरे अफ़साने में तेरा नाम आया तो था

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“जाने कब-कब किस-किस ने कैसे-कैसे तरसाया मुझे,
तन्हाईयों की बात न पूछो महफ़िलों ने भी बहुत रुलाया मुझे”
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मुस्कराते रहो तो दुनिया आप के कदमों मे होगी
वरना आसुओ को तो आखे भी जगह नही देती
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घर के बाहर भले ही दिमाग ले जाओ.. क्योंकि दुनियाँ एक ‘बाजार’ है,

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लेकिन घर के अंदर सिर्फ दिल ले जाओ…क्योंकि वहाँ एक ‘परिवार’ है !!!!

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में पिए रहु या न पिए रहु,लड़खड़ाकर ही चलता हु ,

क्योकि तेरी गली कि हवा ही मुझे शराब लगती हे

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बड़ी तब्दीलियां लाया हूँ अपने आप में लेकिन,

बस तुमको याद करने की वो आदत अब भी है।।

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कुछ ऐब का होना भी ठीक ही है मालिक….
सुना है आप अच्छे लोगो को जल्दी बुला लेते हो….
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हमसे ना कट सकेगा अंधेरो का ये सफर…

अब शाम हो रही हे मेरा हाथ थाम लो…. !!!

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“कोई तेरे साथ नहीं है तो गम ना कर,

खुद से बढ़कर कोई दुनिया में हमसफ़र नहीं होता !!”

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तेरी वफाओं का समन्दर किसी और के लिए होगा,

हम तो तेरे साहिल से रोज प्यासे ही गुजर जाते हैं !!

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नजर में बदलाव है उनकी, हमने देखा है आजकल !
एक अदना सा आदमी भी , आँख दिखा जाता है !!
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पूछता हे जब कोई की। दुनिया मै मोहब्बत है कहा ।।

मुस्कुरा देता हु मै ओर याद आ जाती है माँ

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कोई आँखों में बात कर लेता है,

कोई आँखों आँखों में मुलाकात कर लेता है.

मुश्किल होता है जवाब देना…

जब कोई खामोश रह करभी सवाल कर लेता है!

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हमें तो प्यार के दो लफ्ज ही नसीब नहीं,

और बदनाम ऐसे जैसे इश्क के बादशाह थे हम..

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तुझे तो मोहब्बत भी तेरी ऒकात से ज्यादा की थी …..
अब तो बात नफरत की है , सोच तेरा क्या होगा…. .
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वो कहने लगी, नकाब में भी पहचान लेते हो हजारों के बीच ?
में ने मुस्करा के कहा, तेरी आँखों से ही शुरू हुआ था “इश्क”, हज़ारों के बीच.”
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शौक से तोड़ो दिल मेरा मैं क्यों परवाह करूँ…..!
तुम ही रहते हो इसमें अपना ही घर उजाड़ोगे….!
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ये मुकरने का अंदाज़ मुझे भी सीखा दो
वादे नीभा-नीभा के थक गया हूँ मैं…
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न जाने क्या कशिश है …

उनकी मदहोश आँखों में

नज़र अंदाज़ जितना करो

नज़र उन्हीं पे ही पड़ती है …

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तन्हाई के लम्हे अब तेरी यादों का पता पूछते हैं…

तुझे भूलने की बात करूँ तो… ये तेरी खता पूछते हैं…!!

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आज उसे एहसास मेरी मोहब्बत का हुआ

शहर में जब चर्चा….मेरी शोहरत का हुआ,

नाम नहीं लेती…..मुझे अब जान कहती है

देखो कितना असर उसपर दौलत का हुआ…

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घेर लेने को मुझे जब भी बलाएँ आ गईं

ढाल बन कर सामने माँ की दुआएँ आ गईं

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अजब मुकाम पे ठहरा हुआ है काफिला जिंदगी का,

सुकून ढूंढने चले थे, नींद ही गंवा बैठे”…..!!!

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हमें भुलाकर सोना तो तेरी आदत ही बन गई है, अय सनम;

किसी दिन हम सो गए तो तुझे नींद से नफ़रत हो जायेगी।

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क्यों पहनती हो चूड़ी, क्यों पहनती हो कंगना,

सजने का ही शोक है तो फिर बना लो न सजना |

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पहले हाथ से लिखा प्रेम पत्र देते थे,

अब touchscreen फ़ोन पर टाइप करके भेज देते हैं…..

इश्क़ में ये दुनिया फिर से अँगूठा-छाप

हो गयी”

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जिंदगी हमारी यूं सितम हो गई

खुशी ना जानें कहां दफन हो गई

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लिखी खुदा ने मुहब्बत सबकी तकदीर में

हमारी बारी आई तो स्याही खत्म हो गई

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ये ना पूछ कितनी शिकायतें हैं तुझसे ऐ ज़िन्दगी,

सिर्फ इतना बता की तेरा कोई और सितम बाक़ी तो नहीं.

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कभी हक़ीक़त में भी बढ़ाया करो ताल्लुक़ हमसे….

अब ख़्वाबों की मुलाक़ातों से तसल्ली नहीं होती….”

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“उम्र भर चलते रहे …मगर कंधो पे आये कब्र तक,

बस कुछ कदम के वास्ते गैरों का अहसान हो गया……!!

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ग़ज़ल लिखी हमने उनके होंठों को चूम कर,

वो ज़िद्द कर के बोले… ‘फिर से सुनाओ’…..!!”

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मोहब्बत भी उस मोड़ पे पहुँच चुकी है,

कि अब उसको प्यार से भी मेसेज करो,
तो वो पूछती है कितनी पी है?………

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बुलंद हो होंसला तो मुठी में हर मुकाम हे,ll

मुश्किले और मुसीबते तो ज़िंदगी में आम हे,ll

ज़िंदा हो तो ताकत रखो बाज़ुओ में लहरो के खिलाफ तैरने कि ,

क्योकि लहरो के साथ बहना तो लाशो का काम हे.

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जो लोग दिल के अच्छे होते है,..

दिमाग वाले अक्सर उनका जम कर फायदा उठाते है ।।

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एक बार और देख के आज़ाद कर दे मुझे,

में आज भी तेरी पहली नज़र के कैद में हूँ…!!

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