अजब अपना हाल होता जो विसाले-यार होता
कभी जान सदक़े होती!कभी दिल निसार होता!
ये मज़ा था दिललगी का, कि बराबर आग लगती!
न तुझे क़रार होता! न मुझे क़रार होता!
न मज़ा है दुश्मनी में! न है लुत्फ़ दोस्ती में!
कोई ग़ैर ग़ैर होता! कोई यार यार होता!
तेरे वादे पर सितमगर! अभी और सब्र करते
अगर अपनी ज़िंदगी का, हमें ए'तिबार होता!
जो तुम्हारी तरह तुमसे, कोई झूठे वादे करता
तुम्हीं मुंसिफ़ी से कह दो, तुम्हें ए'तिबार होता!
ये वो दर्दे-दिल नहीं है, कि हो चारासाज़ कोई!
अगर एक बार मिटता, तो हज़ार बार होता!
~दाग़
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